30 लाख के बकाया भुगतान के बदले मांगी 9 लाख की रिश्वत, मथुरा में पंचायत सचिव गिरफ्तार
विजिलेंस आगरा की टीम ने एक लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा, गोवर्धन ब्लॉक की अडींग ग्राम पंचायत का मामला

30 लाख के बकाया भुगतान के बदले मांगी 9 लाख की रिश्वत, मथुरा में पंचायत सचिव गिरफ्तार
विजिलेंस आगरा की टीम ने एक लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा, गोवर्धन ब्लॉक की अडींग ग्राम पंचायत का मामला
मथुरा। जनपद में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। गोवर्धन विकास खंड की ग्राम पंचायत अडींग में तैनात ग्राम पंचायत सचिव मनीष भंडारी को एक लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि सचिव ने निर्माण कार्यों के करीब 30 लाख रुपये के बकाया भुगतान को जारी कराने के एवज में ठेकेदार से नौ लाख रुपये कमीशन की मांग की थी।
मामले में विजिलेंस आगरा सेक्टर की ट्रैप टीम ने शुक्रवार, 6 नवंबर को कार्रवाई करते हुए सचिव को रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद पंचायत विभाग में हड़कंप मच गया है।
दो वर्षों में कराए करीब दो करोड़ रुपये के विकास कार्य
विजिलेंस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ठेकेदार परवेज अहमद ने वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान ग्राम पंचायत अडींग में लगभग दो करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए थे। इनमें सीसी रोड, नाली निर्माण, इंटरलॉकिंग, पार्क और भवन निर्माण जैसे कार्य शामिल थे।
इन कार्यों के बदले ठेकेदार का करीब 30 लाख रुपये का भुगतान लंबित था। आरोप है कि इस भुगतान को जारी कराने के लिए पंचायत सचिव ने 30 प्रतिशत कमीशन यानी नौ लाख रुपये की मांग की थी।
एक लाख रुपये लेते ही विजिलेंस ने दबोचा
बताया गया है कि कथित तौर पर नौ लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। इसमें एक लाख रुपये अग्रिम और शेष आठ लाख रुपये भुगतान मिलने के बाद देने की बात हुई थी।
ठेकेदार परवेज अहमद ने रिश्वत देने के बजाय इसकी शिकायत सतर्कता अधिष्ठान आगरा सेक्टर के पुलिस अधीक्षक से की। शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराने के बाद विजिलेंस टीम ने शुक्रवार को जाल बिछाया।
जैसे ही पंचायत सचिव मनीष भंडारी ने शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये की पहली किस्त ली, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी सचिव के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान आगरा सेक्टर में मुकदमा दर्ज किया गया है।
सरकारी भुगतान में कमीशनखोरी पर उठे सवाल
इस कार्रवाई ने ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया और कथित कमीशनखोरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि विकास कार्य कराने वाले ठेकेदारों को अपना वैध भुगतान पाने के लिए भी कमीशन देना पड़े, तो ग्रामीण विकास व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल मामले में विजिलेंस की कार्रवाई के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच महत्वपूर्ण होगी।










