
ऐसा साहस कोई #वृंदावन में दिखा सकता है?
आज मै हनुमत निवास के पीठाधीश्वर मिथलेश नंदिनी शरण जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं उन्होंने जिस प्रकार से अयोध्या की समस्या को और यहां की सांस्कृतिक और धार्मिकता के हो रहे हनन के विषय को निर्भीकता के साथ बेबाक मंच पे रक्खा ये अयोध्या के किसी भी साधु ने नहीं किया है।
आगे का लेख मीडिया की कलम से
अयोध्या.
अयोध्या का हाल सुनकर दंग रह जाएंगे आप!
अयोध्या की व्यवस्था पर अयोध्या हनुमत निवास के पीठाधीश्वर मिथलेश नंदिनी शरण ने उठाए सवाल
अयोध्या में हुए सांस्कृतिक विध्वंस का सच पहली बार।
अयोध्या के विद्वान संत मिथलेश नंदिनी शरण दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित अयोध्या पर्व के अंतिम दिन बोलते हुए कहा।
लोग हनीमून मनाने के लिए गोवा छोड़कर अयोध्या आने लगे,यही अयोध्या का विकास हुआ है?
आदमी मर जाए पर प्रशासन बैरियर न उठाए, यही अयोध्या का उद्धार हुआ है?
अयोध्या में रहते हुए अगर अयोध्या के प्रशासन से आपका व्यवहार नहीं हैं, तो आपका जीना दूभर है।
यहां के प्रशासन के लिए संत परंपरा का मतलब संत को गनर देकर आसामी से हो गया है।
अयोध्या में राम मंदिर पुजारी चयन प्रशिक्षण समिति के आधार स्तंभ रहे विद्वान संत है मिथलेश नंदिनी शरण।
अयोध्या के इस सांस्कृतिक ध्वस्तीकरण की गवाही दे रहे थे संत, उस समय राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और लल्लू सिंह भी बैठे थे सामने।
अयोध्या अजेय है, उसे कोई जीत नहीं सका है।
वो अपने साथ किए हर अन्याय को ब्याज समेत लौटाती है,ध्यान रहे।*”ये अयोध्या एक धोखा है!
*”कम से कम अयोध्या के घाट तो छोड़ दीजिए।*
वे वेडिंग शूट (Wedding shoot) के लिए नहीं बने हैं।
वे रील बाजों के लिए नहीं बने हैं।
भला आदमी आधा घंटा ठहर नहीं सकता है, ऐसी राम की पैड़ी हो गई है!!
अयोध्या के हाईवे पर हनुमान और वाल्मीकि बैठे हुए हैं।
न सिर पर कोई छतरी। न कोई आवरण।
वे ट्रकों की धूल फांक रहे हैं।
गाड़ियों से शीशा खोलकर थूकते हुए ड्राइवर उनके दो फ़ीट दूर से गुज़रते हैं।
सब कुछ आपके लिए तमाशा है।
सब आपके लिए सिंबल है।
आप खेल की तरह देवी देवताओं का इस्तेमाल करेंगे।
फिर मंदिरों में बैठे भगवान क्या करेंगे, अगर सड़कों पर भी उन्हीं से सजावट होनी है?
अयोध्या में आप दक्षिण के पेड़ लगा रहे हैं। ये पॉम ट्री हैं?
अरे अयोध्या की जलवायु के वृक्ष कहां हैं?
आप पांच गुना-दस गुना पेमेंट करते हैं, फिर उन पेड़ों की रखवाली करते हैं।
इस अयोध्या में रामायणियों की कथा परंपरा ही शून्य हो चुकी है ।”
अयोध्या को शास्त्रों में “अयोध्य” कहा गया है, यानि जिसे शत्रु जीत न सके।
मगर विडंबना तो देखिए, जिस अयोध्या को दुनिया नहीं जीत पाई,
*उसे राम की विरासत के कलियुगी टेंडर के विजेता ठेकेदारों ने मिलकर हरा दिया!!*
दिल्ली में अयोध्या न्यास के अध्यक्ष पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने किया था अयोध्या पर्व आयोजित, प्रतिवर्ष दिल्ली में अयोध्या पर्व आयोजित करते हैं भाजपा की पूर्व सांसद लल्लू सिंह।
पुनः प्रश्न दोहराता हूं। ऐसा साहस कोई वृंदावन में दिखा सकता है। सिवाय एक के?









