
ब्रज भाषा अकादमी स्थापना की पहल करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती मधुशर्मा ने आज लखनऊ में सोमवार को प्रदेश के सांस्कृतिक एवम पर्यटन मन्त्री जयवीर सिंह जी को एक मांग पत्र सोंपा। पत्र में श्रीमती शर्मा ने मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में उर्दू भाषा अकादमी व पंजाबी भाषा अकादमीयां हैं। ब्रज भाषा के संरक्षण के लियें भी ब्रजभाषा अकादमी की महती आवश्यकता है। ब्रजवासी व भक्तगण इस आशय की मांग लम्बे समय से कर रहे है।

इस सन्दर्भ में पद्मश्री सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार मोहन स्वरूप भाटिया जी से बात की गयी तो उन्होने बताया कि ब्रज भाषा हिन्दी साहित्य की आत्मा है। यदि हिन्दी साहित्य में से आप ब्रज भाषा को निकाल दो तो उसमें बचता ही क्या है। आज वास्तव में ब्रज भाषा के संरक्षण के लिए ब्रजभाषा अकादमी की विशेष आवश्यकता है। मैं श्रीमती मधुशर्मा जी के इस प्रयास की भूरी भूरी प्रशंसा करता हूँ।
पदमश्री कन्हाई चित्रकार ने कहा कि सूरदास कुम्भनदास सहित अष्ठछाप कवियों ने भक्तिकाल में ब्रजभाषा में रचना कर हिन्दी भाषा को एक अलग पहचान दिलाई। ब्रजभाषा तो हिन्दी साहित्य का अलंकार है। बिना अलंकार के साहित्य शोभायमान हो सकता है? आज ब्रज संस्कृति के संरक्षण के लिये ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना होना अति आवश्यक है। भाजपा जिलाध्यक्ष का यह कदम सराहनीय है।
भाजपा जिलाध्यक्ष के इस कदम से ब्रजवासियों को ब्रजभाषा अकादमी बनने की उम्मीद बंधी है। पूरे जनपद में इस बात की चर्चा है।









