यूक्रेन में मथुरा जनपद के फंसे है चार छात्र – छात्राएं, दैनिक उपयोग की जरूरी चीज खरीदने के लिये यूक्रेन में लगी दो-दो किमी लंबी लाइन, मोमबत्ती तक खरीद रहे लोग

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कई भारतीय छात्र यूक्रेन में फंस गए हैं। इनमें मथुरा की एक छात्रा और तीन छात्र भी शामिल हैं। ये तीनों यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। वृंदावन के समीपवर्ती गांव कीकी का नगला निवासी हरिमोहन कुशवाहा का पुत्र योगेश कुशवाहा यूक्रेन के डेनीप्रो शहर की मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। छात्र योगेश ने बताया कि यूक्रेन में इस समय आपातकाल जैसे हालात हैं। डेनीप्रो शहर में भी खौफ का माहौल है। युद्ध से भयभीत लोगों की भीड़ सुपर मार्केट में खानपान की चीजों को खरीदने के लिए उमड़ रही है। स्थिति यह है कि पावर कट की आशंका के चलते लोग मोमबत्ती तक खरीद रहे हैं।

एमबीबीएस छात्र योगेश कुशवाहा ने कहा कि डेनीप्रो शहर में पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर, खाने-पीने के साथ अन्य उपयोगी वस्तुओं के सुपर मार्केट पर दो-दो किलोमीटर लम्बी लाइन लगी हुई है। एयर सिस्टम सीज कर दिए जाने के बाद जल्द भारत आने की उम्मीद भी नहीं हैं। हम लोग भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं वहां से सुरक्षित निकालने का आश्वासन दिया गया है।
योगेश ने बताया कि डेनीप्रो शहर में मथुरा के राया निवासी ऋतिक वर्मा और छटीकरा निवासी योगेश पचौरी सहित भारत के 600 छात्र-छात्राएं फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार की सुबह हमले की जानकारी होने के बाद पिता हरिमोहन और मां राधारानी से बात की थी।
वृंदावन में योगेश के माता-पिता उसकी सलामती को लेकर बेहद चितिंत हैं। योगेश ने उन्हें बताया कि हम सभी भारतीय यहां सुरक्षित हैं। हमें भारत सरकार पर पूरा भरोसा है। भारत सरकार हम सभी छात्रों को सुरक्षित वापस ले जाएगी।
वहीं मथुरा के कोसीकलां के आर्य नगर निवासी करन सिंह एडवोकेट की पुत्री याशिका सिंह भी यूक्रेन के एक विश्वविद्यालय में एमबीबीएस कर रही है। गुरुवार की सुबह यूक्रेन में युद्ध की खबर मिलते उसके माता-पिता बेचैन हो गए। वह फोन के माध्यम से लगातार उससे संपर्क बनाए हुए हैं।









