
ब्रज तीर्थ विकास परिषद व द ब्रज फाउंडेशन की लड़ाई अपने चरमोत्कर्ष पर है । एक दूसरे को शिकस्त देने के लिये हर दाव आजमाया जा रहा है। लोग इसे धर्म युद्ध की संज्ञा दे रहे हैं। इस धर्म युध्द में किसकी जय होगी किसकी पराजय ये अभी भविष्य के गर्त में हैं।
अपनी-अपनी जीत के लिए वाणों (आरोपो)की बौछार की जा रही है। दिव्यास्त्रों ( पुराने मामले उठाना) का भी जबरदस्त प्रयोग किया जा रहा है।
ब्रज फाउंडेशन के अध्यक्ष विनीत नारायण कई वर्षों से ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। 10 जनवरी को विनीत नारायण के उन हमलों का जबाब देते हुए श्रोत मुनि आश्रम में वृन्दावन के कुछ संत, महंत, महामंडलेश्वर व धर्माचार्यों की बैठक आयोजित की गई । जिसमें योद्धा पत्रकार विनीत नारायण पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग व गधे पर बिठाकर देश निकाला व समुन्द्र में डुबाने की बात कही गयी।
विनीत नारायण ने जबाबी हमला करते हुए इस तरह का कृत्य करने वाले धर्माचार्यों के खिलाफ देश भर के उच्च न्यायालयों से मानहानि के नोटिस भिजवाना शुरू कर दिए ।
विनीत नारायण पर जबाबी हमला करने के लिये व नोटिसों का जबाब देने के लिये मीटिंगों का दौर चला। कई दौर की मीटिंगों के बाद भी जब कोई पुख्ता योजना नही बन पाई तो विनीत नारायण के खिलाफ एक षड्यंत्र की रचना की गई।
षड्यंत्र के लिये चुनाव किया गया राममंदिर निर्माण की प्रगति की जानकारी देने वाली बैठक का।
आपको बता दें कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष चम्पत राय श्री राम मंदिर निर्माण की जानकारी देने के लिये वृन्दावन आये हुए थे । जिसमें वृन्दावन के सभी धर्माचार्यों को बुलाया गया था।
षड्यंत्रकारियों द्वारा इसी बैठक में अपने षड्यंत्र को अमली जामा पहनाया गया। चुपके से गृहमंत्री अमित शाह के नाम विनीत नारायण व द ब्रज फाउंडेशन के खिलाफ एनजीटी के जनवरी 2020 के एक लम्बित पड़े आदेश का हवाला देते हुए सीबीआई जांच कराने का एक माँग पत्र चतुःसम्प्रदाय के लेटर पैड पर टाइप करा कर उपस्थित धर्माचार्यों के हस्ताक्षर करा कर चम्पत राय को बड़े संतों के हाथों से सौंपा गया। बाद में मीडिया में विज्ञप्ति जारी कर दी गयी।
द ब्रज फ़ाउंडेशन ने पलट वार करते हुए विज्ञप्ति जारी की जिसमें षड्यंत्रकारियों की इस माँग का ऐलानियाँ समर्थन करते हुए द फ़ाउंडेशन के सचिव रजनीश कपूर ने विज्ञप्ति में कहा की ये माँग हम दो वर्षों से शासन से करते रहे हैं।
रात होते होते जब हस्ताक्षर करने वाले धर्माचार्यों को इस संदर्भ में जानकारी हुए कि उन्हें बिना बताए ऐसे किसी पत्र पर हस्ताक्षर कराकर माँग पत्र गृह मंत्री अमित शाह को भेजा गया है व इस आशय की जानकारी मीडिया में भी भेजी गई है तो सभी धर्माचार्यों में हड़कम्प मच गया।
सभी ने अपने अपने स्तर से इस बात का खंडन करना शुरू कर दिया। कई संतों का कहना था कि बैठक में सिर्फ श्री राम मंदिर निर्माण की प्रगति पर चर्चा हुई थी । इसके अलावा और किसी बिन्दु पर कोई विचार नही किया गया था। विनीत नारायण व द ब्रज फाउंडेशन के खिलाफ लिखे गये शिकायती पत्र पर उनसे धोखे से हस्ताक्षर कराए गये।
मध्यरात्रि तक सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा ने उस समय जोर पकड़ लिया जब भागवताचार्य मृदुलकान्त शास्त्री ने फेसबुक पर इस घटना की आलोचना करते हुए इस पत्र का पूर्णतः खंडन कर दिया।
पूरे ब्रज मंडल में इस बात की खासी चर्चा है।
राजनीति में अक्सर षड्यंत्र देखने को मिलते है। धर्म मे षड्यंत्र का पहली बार प्रयोग होता देखा जा रहा है।
लोगों की समझ मे ये नही आ रहा कि उन सन्तो की ऐसी क्या मजबूरी है जो विनीत नारायण को शिकस्त देने के लिये इस निम्न स्तर पर गिर कर षड्यंत्र करना पड़ रहा है।यह धर्म युद्ध दिलचस्प मोड़ पर है लोगों की जिज्ञासा बनी हुई है आखिर ऊंट किस करवट बैठेगा।
क्या विनीत नारायण का होगा अभिमन्यु जैसा हाल या षड्यंत्रों के चक्रव्यूह को तोड़ कर एक बार फिर बनेंगे विजेता।







