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उजडने से पहले कैसा था डालमिया बाग, देखे उस वक्त की जीवंत तस्वीरें।

करीब 5 सैकडा पैडो से लहलाता डालमिया बाग पशु पक्षी व छोटे छोटे जीवों का बसेरा था। कहा जाता है ठाकुर राधा श्याम सुन्दर बाग होने के कारण सभी जीव प्रभू की लीला का आनन्द लेते थे। लेकिन धन पिशाच लोगों को वृन्दावन को बेचने की ऐसी लालसा बनी पडी है जो अब उचित अनुचित का भी ख्याल नही करते । इन के लिए वृन्दावन आस्था का विषय नही केवल धन कमाने का विषय है। जो व्यक्ति भावनाओं से भरा है वह धार्मिक है जिसमे भावनाऐ नही है उसके लिये वृन्दावन केवल एक विक्रय की वस्तु है ओर आने वाले श्रद्वालु धन की पेाटली है बस उनसे किसी भी प्रकार धन मिलना चाहिए।
धन के इसी लालच के कारण ये कानून की धज्जीयां उडाने से भी नही चूकते। धन व राजनेतिक रसूख के चलते ये साम दाम दण्ड भेद किसी भी तरीके के अपने लाभ के लिये किसी भी कृत्य को अंजाम दे देते है। इससे पहले साढे 10 एकड भूमि में गुरू कृपा कुटीर के नाम से विकसित कॉलोनी में भी इन धन पिशाचों ने 150 से अधिक पेडो की निर्मम हत्या की थी। उसके बाद इनका मनोबल बढा हुआ था। इसी कारण 33 एकड इस भूमि मे इन्होन 300 से अधिक पेडों के साथ साथ वहां रह रहे निरीह जीवों की हत्या कर दी। यह तो छोटे मोटे न बोल पाने वाले निरीह जीव है ये तो धन की चाह में इतने अंधे हो गये है कि इनकी राह में कोई व्यक्ति भी आ जाय तो ये उसकी हत्या करने से भी न चुके। इस बात की भी चर्चा है कि गुरूकृपा कुटीर में शिकायत करने वाले एक पत्रकार को भद्दी भद्दी गालियों के साथ गोली मरवाने का औडियों भी वायरल हुआ था। कहा तो यहंा तक भी जा रहा है कि रास्ते न हटने पर उस पत्रकार पर बलात्कार सहित आधा दर्जन से अधिक मुकदमे तक लगवा दिये गये।
आज हम आपको राधा श्याम सुन्दर बाग उर्फ डालमिया बाग की वो पुरानी तस्वीरे दिखाने जा रहे है जब वह अपने शबाब पर था व कई दशकों से गुलजार था। देखिए उसकी तस्वीरें जिसमें कदम्ब, पीपल, बरगद, जामूुन, तुलसी आदि के पेड लगे हुए थे। ये तस्वीरे वे पुरानी वास्तविक तस्वीरे है जिन्हे कोई झुटला नही सकता।






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